ना जाने कोन सी मज़बूरी उसे घर से खींच लें थी...
वो जब तक जिंदा रहा घर को याद करता रहा...
आज के इस दौर मे इन्सान इस आधुनिक दौर मे अच्छे रहें सहन के लिए अपनी मिटटी से दूर शहरों मे एक अच्छा जीवन जीने के लिए आते हैं और अपने असल मकसद से भटक जाते हैं और इतना आगे निकल जाते हैं कि ना तो वो शहर के रह जाते हैं और ना ही अपने गांव लौट पाते हैं कियोंकि उनके बच्चों को इस शहर कि आदत लग जाती है और वो अपनी मिट्टी से इतना दूर हो जाते हैं की आज के दौर मे समाज मे अपना मकाम खोजने के चक्कर मे अपनी मिट्टी अपने बुजर्गों और तो और अपने जन्म भूमि से भी दूर हो जातें है की उन्हें पता ही नही चलता और जब अपता चलता है तो बहुत देर हो चुकी होती है और वो अपनी मिट्टी से दूर निकल चुके होते हैं की लोटने के सारे रास्तें बंद हो चुके होते हैं और मज़बूरी मे इस तनाव भरी जिंदगी जीने को मजबूर हो जातें है...अगर वक्त रहते लोग अपनी गांव लौट जायें तो अच्छा है...इस से हम अपनी भारतीये सभायेता को काफी हद तक बचा पाएंगे और अपने बच्चों को एक स्वस्थ भारतीये सभ्यता दे पाएंगे...हमे इस आधुनिक दूर से आगे निकल का सोचने की ज़रूरत है.....
Monday, April 7, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
1 comment:
KALIM SAHAB ,
ekdam uchit likha hai aapne ..hame aadhunikta se aage nikalkar sochne ki zaroorat hai . chalo gaon ki or !!
Post a Comment