एक ही उल्लू काफी था बर्बादे गुलिस्तान के लिए,
हर शाख पर उल्लू बैठा है बर्बादे गुलिस्तान क्या होगा॥ शायर ने शायद ठीक ही लिखा था...
भारत को आजाद कराने के लिए बलिदान देने वालों ने शायद ही कभी ऐसा सोचा होगा..जिस देश की लिए माओं ने अपने सपूतों को कुर्बान करने मे फक्र किया था आज उसी देश की माओं को देश की दुर्दाश देख कर रोना तो आता ही होगा..भारत को किसानों का देश कहा जाता था आज वो ही किसान और उसका परिवार भूखा मर रहा है॥जिन देश भक्तों ने देश के लिए जान दी आज उन्ही के परिवार के पास रहने को छत नही है और न ही खाने को खाना॥जो लोगो आज देश को चला रहें हैं उनके पास किया किया मौजूद है शायद वो भी नही जानते..आज के नेता तो जानवरों के चारा भी नही छोड़ते..कोई सुरक्षा के समान को खरीदने मे दलाली ले लेता है.. और देश की सुरक्षा कर रहे जवानों की ज़िंदगी को देश के दुश्मनों के सामने पेश कर देते हैं..यह हमारी उन लाखों शहीदों को श्रीध्न्जली तो कभी नही हो सकती..न ही देश भक्ति हो सकती है..हमे अपने नेताओं के बारे मे एक बार फिर सोचना होगा की देश उनके हाथों मे कितना सुरक्षित है....
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